सुधर जाओ
सुधर जाओ..
जब घिर जाओ अपनी ही मूर्ख करतूतों से
ऐ जाहिलों तब ही जागोगे ?
सारी दुनिया गांधी नही
जो कीचड उछालने पर भी तुमसे सौम्य रहे..
कुछ ज्यादा ही फायदा नहीं उठा लिया
तुमने गांधी नेहरू का ?
और अपने पर आते ही तुम्हारी सिट्टपिट्टी गुम ,
घिग्गी बंध जाती हैं ?
कुछ ज़ुबान पर ही लगाम कसो
कुछ करनी को भी सुधारो तुम
हमेशा तुम्हे बचाने गांधी नेहरू से फरिश्ते नही आ सकते
शैतानों को अपना नुमाइंदा चुन लेने बाद भी यह उम्मीद क्या लाज़मी है ?
अब भी समय है सुधर जाओ,
जनता के दुःखों को दूर करो
जिस जनता के बल पर राज करो
उसका भी कभी सम्मान कर लिया करो...
...... © अँब्रोस चेट्टियार
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