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नोव्हेंबर, २०२२ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

तो आलाय

#BharatJodoYatra  #नफरतछोडोसंविधानबचाओ  तो आलाय तो आलाय तुझ्या दारात  तुझ्या गावात  पंचक्रोशीत दुमदुमतंय नी तो, पुकारतोय तुला  ठोठावतोय तुझ्या मनाची कवाडं   जागं करतोय तुला नी तू झोपलायस् झापड घेऊन ऐकतोयस् सावधपणे तुझ्या मनात भरलीयेत किल्मिशं दाटलीयेत जळमटं  कित्येक दशके ऐकून ऐकून  विषाक्त झालेत तुझे कान.  तुझ्या मनात फुलतोय अंगार, तुझ्या जिभेवर काटे फुलतायत त्याच्यासाठी आणि तो निशस्त्र होऊन आलाय. त्याच्याकडे आहे शस्त्र प्रेमाचं, करुणेचं, नी अदबीचं.  तो तुझी वाट पाहतोय, त्याच्या नजरा शोधतायत तुला. तो बघतो मान उंचावून, असशील तू समोर म्हणून  तो वळून बघतोय डावीकडे, नी उजवीकडेही.. वाहत्या दुतर्फा भावनांच्या कल्लोळाकडे  पाहतोय तो समाधानाने आणि कृतज्ञतेने ही.  तो कवेत घेत चाललाय, दोन्ही हात उंचावून उघडून  सर्वाना हक्काचा खांदा देत,  सर्वांना हक्काची छाती देत.  कोणी डोके ठेवतेय त्याच्या छातीवर, दंडावर, बाहूवर कोणी हात धरतेय त्याचे,  कोणी त्याला पोटाशी धरते आहे.  तो पुसतो आहे त्यांचे क्षेम कुशल. कोणी ...

वास्तव

  वास्तव विस्तव गार मढं गोळं पोस्त्यात चार हाडं 🙏🏾 ©अँब्रोस चेट्टियार

संविधान बचाना है |

संविधान बचाना है। तरमपमपम तरमपमपम ला ला ला ला ला ssss संविधान बचाना है आगे बढते जाना है साथ साथ चलते हुए लोगों को बताना है | हाथ साथ लेते हुए बात करेंगे हँसते मुस्कुराते हुए साथ चलेंगे। संविधान बचाना है .... बापू के नेहरू के बाबा साहब के आदर्शों में हमेशा जोतिबा रहे । संविधान बचाना है ..... पढने से लिखने से आगे बढ़े हैं संविधान के वजह से आज खडे हैं । महिला को पढने का हक जो मिला है संविधान के वजह से हक ये मिला हैं | संविधान बचाना है.... प्रांतभेद जातिभेद अब नही पले आओ सभी मिलकर मिटादें फासले | संविधान बचाना है. संतों की भूमी है विचारकों की है मानवता मूल्य की सुधारकों की है | संविधान बचाना है... लिंग भेद ना हो कोई कमतर नही समता के मूल्य से कुछ बढकर नही | संविधान बचाना है... मानवता के हृदयको छलनी जो करे ऐसे क्रूर दुष्ट से घर बचाना है | संविधान बचाना है... प्राणी जीव जंतु सभी इक समान है भूतदया का प्रकृति का सम्मान है | संविधान बचाना है .... सावित्रीमाई और फातिमाबी का कर्ज भला कोई कहो कैसे उतारे | संविधान बचाना है.... खेतिहर किसान यहाँ...

सोचा ये मैने

  सोचा ये मैने सोचा ये मैने तुमसे कहदूँ के मै भी साथ चल रहा हूँ साथ चल रहा हूँ | तेरे कदम जो उठे मेरी रूह साथ चल पडी है | तुझसे कुछ नाता है बिन बाँधे जो जुड जाता है | हाँ ! मै भी आहट पा करके झट साथ तेरे हो लेता हूँ | मै एक नही तू देख सही तुझ संग सब नेक हैं दुनियाँ के | हठ दुनियाँ में कोई कर बैठा जो घातक जीव का, भक्षक हो | तुझको तेरी हो बात खबऱ तू नेक है बंदा जब्तो सबऱ | तू दुनियाँ का उजियारा है तू राह दिखा दुनियाँ जो चले |   ©अँब्रोस चेट्टियार

यात्रा

यात्रा साधारण जन गण की बात करें पुरुषार्थ वाली बात करें ये यात्रा है तुम, हम सबकी हर कोई कहीं शुरुआत करें समर्थन न देना चाहे अगर कोई बात नही सम्मान करें चाहे अलग हों पथ भी कहीं जनकल्याण का आग़ाज़ करें | जनता नही रूकती कभी उसके हाथ पर उसका पेट जो है वो मेहनत करती जाती है वो धरती पर ही खटती है वहीं पर सिर झुकाती है | ओर कभी तुम उनसे मिलो बाहें फैलाए मिलते हैं  पीठ सीधी उनकी होती है वो सबको गले लगाते हैं फिर भी जनता कहलाते हैं | सिर झुका हुआ न पाओगे आँखोंसे आँख मिलाओगे गर तुममे होगी गैरत तो उस आँख में देख पाओगे | आज देख रहा है जग सारा तू देख रहा जनता को जब यह तेरी तपस्या का फल है जो देख समझ सब पाता है | जनता को आस अब तुझसे है ज्यूँ कटुता तेरे पास नही हम सब की दुलारी धरती माँ बेटे भी किसीके दास नही | चुप रहना सहना डर नही वो अंतर (अंतरमन) को दिखाता है पानी गहरा सर डूबे तो उसे तैर तारना आता है | बन किसान फ़सल उगाता है वो पालता पेट और जग सारा करे बंजर खेत को उपजाऊ चुन, पीट, पाट कंकड सारा | ना उसको हलके मे लेना हे सत्तालोलुप गीदड तुम जब अन्नदाता ही नही रह...

मित्रहो

  आज तुम्हारी बरसी पर ये दिन बडा भारी है मुझपर फिर याद तुम्हारी ले आया दूर ही सही पर अहसास तो था हम पर था तुम्हारा साया | पर निष्ठूर समय का चक्र चला सब कुछ तीतर बीतर पल में तुमसे बिछडना भी बदा था अडिग अटल थे विचारों में | हमने जब भी देखा, देखा लंबी रेखा खिंची हुई हमको थी गौरवान्वित करती रौशन होती रही, हुई | तुम हमारे लिए थे अद्भुत नाम तुम्हारा साँसों मे दूर भले ही रहे हों जग में ख़ैरियत की सदा दुआओं में | हमने भरसक कोशिश की पर पहुँच सके ना तुम तक हम तुमने भी क्या की थी चेष्ठा, हमतक पहुँचने लिये थे श्रम ? रह गई दिलमें हसरत दिलकी दूर करादें गिले शिक़वे दिल की ग़र हम सुन पाते तो नही उपजते ये फाँसले | बसमें किसिके कोई थे नही अहम बडा हो चला था तब कुछ समझदारी की कमी थी कोशिशें किसीने की हीं कब ? चाहा सुनना तुमसे अच्छा कुछ हरदम ये मन करता था आज तुम्हारी बरसी पर मगर आकुल व्याकुल हो उठा |     ©अँब्रोस चेट्टियार      मित्रहो आज मला तीव्रतेने आठवण होत आहे ती गेल्या वर्षी १२नोहेंबरला शुक्रवार दिवशी मी दिवस भर hospital मध्ये थ...

आज तुम्हारी बरसी पर

आज तुम्हारी बरसी पर ये दिन बडा भारी है मुझपर फिर याद तुम्हारी ले आया दूर ही सही पर अहसास तो था हम पर था तुम्हारा साया | पर निष्ठूर समय का चक्र चला सब कुछ तीतर बीतर पल में तुमसे बिछडना भी बदा था अडिग अटल थे विचारों में | हमने जब भी देखा, देखा लंबी रेखा खिंची हुई हमको थी गौरवान्वित करती रौशन होती रही, हुई | तुम हमारे लिए थे अद्भुत नाम तुम्हारा साँसों मे दूर भले ही रहे हों जग में ख़ैरियत की सदा दुआओं में | हमने भरसक कोशिश की पर पहुँच सके ना तुम तक हम तुमने भी क्या की थी चेष्ठा, हमतक पहुँचने लिये थे श्रम ? रह गई दिलमें हसरत दिलकी दूर करादें गिले शिक़वे दिल की ग़र हम सुन पाते तो नही उपजते ये फाँसले | बसमें किसिके कोई थे नही अहम बडा हो चला था तब कुछ समझदारी की कमी थी कोशिशें किसीने की हीं कब ? चाहा सुनना तुमसे अच्छा कुछ हरदम ये मन करता था आज तुम्हारी बरसी पर मगर आकुल व्याकुल हो उठा |     ©अँब्रोस चेट्टियार

सावधान

सावधान सावधान ! आप आज किनके कदमों में है यह आपके बीते कलकी उपलब्धियों की पोल खोलेगा : कि वह काबिलीयत थी या सोची समझी साज़िश l क्या सोची समझी साज़िश के तहत तुम इतने ऊंचे उठ पाये हो.. वर्ना.. तुमसे भी बेहतर मगर इमानदार लोग अगल बगल में ही हैं जमाने से .... खैर.... मुबारक़ हो ! तुमने स्वयंम ही अपनी पोल खोलने में बिलकुल भी झिझक नही दिखाई | इससे जाहिर है , तुम्हारी, अपनी कुछ, अपरिहार्य सी मजबूरियाँ रही होंगी | फिर भी... कैसे ठग लेते हैं लोग , अपनी प्राकृतिक सी दिखने वाली हँसी द्वारा मासूमों को साल दर साल उमर दर उमर ....     ©अँब्रोस चेट्टियार

भविष्य

 भविष्य ने भविष्य के कपाल को है चूम लिया नई कोपलों में जिसने साहस है भर दिया l *अँब्रोस चेट्टियार*

आपले डॉक्टर

  आपले डॉक्टर सुखी संसाराची सुत्रे पाठ होती डॉक्टरांना त्यांना एके दिशी वाटे द्यावे ज्ञान हे सर्वांना || प्रण त्यांनी केला थोर अभ्यासून जनलोका हवे नको ते पुरवावे साह्य व्हावे एकमेका || कार्य मोठे वाढलेले त्यांच्या पुढे जाणताच कुटुंबाची वाहुन धूरा समाजाचे जीवन केले || रुग्णसेवा थोर केली सामाजिक कार्यातून अंधश्रद्धा मूळ आहे आले त्यांना जाणवून || क्षण एक ना उसंत कधी डॉक्टरांनी घ्यावी श्वासश्वास कार्यासाठी दिला पुढे एक एक || प्रबोधन कार्य सुरू युद्धस्तरावर झाले व्याख्यानी लेखनी सारे चौफेर ते लढे दिले || कार्य थोर उभे होते जगतास कुठे जाण विरोध्यांस मात्र धाप कुणकुण भुणभुण || वैज्ञानिक दृष्टिकोन जगतास तारणारा त्याचा केला पुरस्कार जागे केले सरकारा || असे कार्य अविरत चालायास पाहिजे ते वाहूनी जीवन दिले असे लोक पाहिजे ते || स्वार्थलाभ त्यागणारे नाम क्षेम सोडणारे जनतेच्या समाजाच्या साठी हवे झटणारे || हात हाती साथी साथ येता होई कार्य मोठे भेदाभेद विसरून समाजास सांधणारे || तीळभर कार्य होई अवचीत खूप मोठे सर्वजन सहभागी ज्ञान प्रेमाचे रोपटे || संघर...