अंधश्रद्धा का करें दहन



*अंधश्रद्धा का करें दहन*


श्रद्धा में और अंधश्रद्धा में ग़फलत कभी न हो  

आँखे खोलो पाखंडों को अब तुम चूर करो..

जीवन अपना है अनमोल व्यर्थ कभी न हो 

प्रश्न पूछना अर्थ जानना अनर्थ कभी न हो

                       आगे अनर्थ कभी न हो ...

              

पाखंडी जब  ढोल पीटके जनता को भरमाता है

अनपढ मूरख अज्ञ व्यथित मन चंगुल में फंस जाता है

बदहाली से लडती जनता पाखंडी की चमकधमक  

पाखंडी के भेद खोलने हमको आगे आना है 

                          अब हमको आगे आना है...

                

ईंधन के बिन दिए हैं जलते भूत प्रेत का डर फैले 

क्यों न तुम्हारे मनमें कौंधा सच्चाई की तह खोलें

दूध शेरनी* का हाजिर तो व्यर्थ करें क्यों  विष का ग्रहण

पथ विज्ञानका चलके साथी अंधश्रद्धा का करें दहन,

पथ विज्ञानका चलके साथी अंधश्रद्धा का करें दहन.

       .... ©अँब्रोस चेट्टियार, ठाणे. 25/08/2022







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