ज्ञान वृक्ष के साहित्य सेवक


ज्ञान वृक्ष के साहित्य सेवक

ये टोकने ताने मारनेवालों का बडा अजब काम होता है
स्वयम करें तो महान कार्य है, कोई और करे तो धोखा है

खुद तो ये बकवास करेंगे स्वयम की टट्टी में डंडा पीटेंगे
और किसी साफ-सूथरे आँगन को नाक भौं सिकोडेंगे

आश्चर्यकी कोई बात नही उनकी दौड ही होगी सीमित सी
ये फूंक के चिंगारी भडकाएँ आग लगे तो भग लेंगे  

ये बातें बडी बडी करेंगे तिसपर मेहनताना पायेंगे
मगर किसी की खून पसीने की कमाई जानबूझकर रौंदेंगे

इनका कोई भगवान नही न इनकी अपनी ग़ैरत है
बस नाम धरो कुछ टका सा कहाँ अच्छे काम को करना है

ये चुप ही रहे तो मेहेरबानी, बात जिनकी समझ ना आती हो
पाँव नही जिनके धरा पर झूठ से फूली छाती हो

ये नाम समाज का लेते बहुतेरे, बस पंडिताई ठेले हैं
सुलझाने के पीटें डंके भरे घर दिमाग में इनके अपने ही झमेले हैं
अपने ही झमेले हैं....

ये ज्ञान वृक्ष के साहित्य सेवक, इनकी एक भी टहनी फली नही
भद्दी कटुता वाल़ि तुच्छसी क्षुद्रसी भाषा तजके कभी फूली नही
तुच्छसी क्षुद्रसी भाषा तजके कभी फूली नही
    ©अँब्रोस चेट्टियार


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