भाडखाव
भाडखाव
भाडखाव मंतरी बनेंगे
तो संतरी भी खूब फलेंगे
लोकलाज बेचके चलेंगे तो,
लुटेरे भी माला जपेंगे
भाडखाव मंतरी बनेंगे
तो संतरी भी खूब फलेंगे
जनता को लूटते चलेंगे तो
चोरों के महल सजेंगे
भाडखाव मंतरी बनेंगे
तो संतरी भी खूब फलेंगे
पानी चुराओ बेचो
बिजली चुराओ बेचो
जनता के मूँह से
निवाले चुराओ बेचो
जनता का खून चूस लेंगे
तब नेता के बच्चे पलेंगे
भाडखाव मंतरी बनेंगे
तो संतरी भी खूब फलेंगे
खेती चुराओ बेचो
जंगल चुराओ बेचो
आबरू को ढकने वाले
कपडे उतार बेचो
गरीबों के लाश बेच देंगे तो
नेतन के कफन जुटेंगे
भाडखाव मंतरी बनेंगे
तो संतरी भी खूब फलेंगे
दुष्टन को आज जान
ज्ञान की मशाल तान
उजियारा खिंच लाओ
अँधियारा दो भगावो
कदम कदम हिम्मत कसोगे
तो तब तुम्हरे दिन भी फिरेंगे
वरना
भाडखाव मंतरी बनेंगे
तो संतरी ही खूब फलेंगे
पढने से लिखने से
ज्ञान ज्योति जलती है
एक एक आगे बढे
अगले को हिम्मत दे
हाथों से घर घर सजेंगे तो
देश के हम गौरव बनेंगे
वरना
भाडखाव मंतरी बनेंगे
तो संतरी ही खूब फलेंगे
©अँब्रोस चेट्टियार
टिप्पण्या
टिप्पणी पोस्ट करा