सावधान
सावधान
सावधान !
आप आज किनके कदमों में है
यह आपके बीते कलकी
उपलब्धियों की पोल खोलेगा :
कि वह काबिलीयत थी
या सोची समझी साज़िश l
क्या सोची समझी साज़िश के तहत
तुम इतने ऊंचे उठ पाये हो..
वर्ना..
तुमसे भी बेहतर
मगर इमानदार लोग
अगल बगल में ही हैं जमाने से ....
खैर....
मुबारक़ हो !
तुमने स्वयंम ही
अपनी पोल खोलने में
बिलकुल भी झिझक नही दिखाई |
इससे जाहिर है ,
तुम्हारी, अपनी कुछ,
अपरिहार्य सी मजबूरियाँ रही होंगी |
फिर भी...
कैसे ठग लेते हैं लोग ,
अपनी प्राकृतिक सी दिखने वाली
हँसी द्वारा मासूमों को
साल दर साल उमर दर उमर ....
©अँब्रोस चेट्टियार
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