नफरत छोडो भारत जोडो
नफरत छोडो भारत जोडो
इसी एक नारे मे सब कुछ आ जाता है
फिर आप को अलग से नारा गढकर
अपने कदम को अलगसा
साबित करने की जरूरत क्यों पडती है ?
भारत का संविधान सर्वोपरि है मगर
आज वह भी बहोत ही
मुश्किल दौर से गुजर रहा है
उसे बचाना बेहद अहम काम है
ऐसा करने में कौन सक्षम है भला आज
ध्यान से देखो तो
भारत की जनता ही यह काम कर सकती है |
और उसकी जागृति के लिये सबसे पहले
भारत को जोडना ही प्रथम कार्य होना चाहिए
क्योंकि आज ती स्थिती
लोगों के बँटने से ही पैदा हुई है
अगर न बँटते लोग तो ये दुस्साहस क्या कोई कर पाता ?
क्या लोगों को विभिन्न भेदों में बाँट पाता ?
मगर अफसोस ऐसा ही हुआ है ..
क्योंकि उनका दाँववसही पडता गया
हम ही नासमझ बन उनकी मंशा को भाँप नही पाए |
सोचिए किस तरह उस महात्माने हम सब को
एक सूत्र में बाँधा होगा ?
हममे तो सदियों से बिखरने की गुंजाईश रही है
मगर बँधे रहने का भी हुनर हमे आता है जिसे बडे ही खूबी से भुलाना सिखा दिया और हम फँसते चले गए भेद के गर्त में ..
और बँटते चले गए ...
तो आज का प्रथमिक कर्तव्य है जुडना जोडना
और तब ही हम बडे समझदारी से अपने दाईत्व को जान सकेंगे
और अपने कर्तव्य का निर्वाह स्वयं करपाने मे सहज सक्षम बन जाएँगे और फिर जल्द नही बिखरेंगे..
मगर इस राह पर हम तुरंत ना चल दें और धीमे धीमे किसी और ही जालमे फँस जाएँ ऐसी कुछ सोच से इस राह से समांतर कुछ राहों पर हमे चलने के लिए आवाहन करते कुछ लोग हमारे जनता मे एक धुँधली भेद की रेखा खींचते चले जा रहे हैं
वे जानना समझना नही चाहते कि भारत के जुडने से सभी प्रश्न अपने आप हल हो सकते हैं
शायद वे नही चाहते की बीच का रास्ता जो हमने अख्तियार किया था उसी पर चला जाए
वे बाये मोडना चाहेंगे मगर उसका परिणाम बरबस दाएँ मुडने मे ही होगा और
सीधी राह की सारी मजिले एक एक कर वे ध्वस्त करने मे सहायकारी होंगे..
या फिर उनकी यही असल मंशा हो ..
वरना उस महात्मा और उसके शिष्यों ने सभी राहों को समझबूझ कर अपनी अलग ही राह क्यों चुनी होगी ?
जिसकी कायल सारी दुनिया रही
जिसके दम पर हमने जनता के लिए इतनी कुछ पा लिया था
जिसको बरबाद करने मे ही धन्यता मानने वाले जनता के विकास विरोध मे सब काम करते देश की धरोहर को डुबोचे चले जा रहे हैं
और इस बिखराव से बचने के लिए जुडना जोडना ही एकमात्र मार्ग जानते हुए भी अपनी शक्ती गलत राह पर खर्च करने वाले लोग जनता के लिए करने वाले कहलाने के भ्रम फैलाते चले जा रहे हैं .. युवकों को पढना और समझना चाहिए .. कौन सच्चा है, और कौन झूठो के प्यादे हैं ?
हम्म!!!!!
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