गाँधी नेहरू चाहते तो किसी भी धर्म की सीख को अपना सकते थे मग़र उन्होने अपने ज़मीर की बात को मानना गवारा समझा | वे सम्राट अशोक की सीख से बहुत ही प्रभावित थे सो उन्होने  अहिंसा समता बंधुता अस्तेय अपरिग्रह और केवल किसीके कहने भर से  मानने से आगे जाकर सत्य की खोज कर उसे जानने की परिपक्व सीख देने वाले बौद्ध धर्म की सीख को जीना बेहतर समझा और देश के लिए हमेशा देते ही आए | 

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