ललन की खोज |
ललन की खोज |
उन लाशों मे कैसे मै ढूँढू ललन को
मेरी आँखों में छाया कोहरा घना है |
क़दम मै रखूँ तो है अँगों पे पडता
किसी का ललन होगा सोया जमीं पर |
वो ढेरों सी लाशें दहलता है अंबर
के झकझोरने वाली बदली भी चुप है |
के कैसे भयंकर वो दानव की बेटी
बनी जोकि पहले कभी यूँ नही थी |
चली दनदनाते यहाँसे वहाँ तक
के पहुँचाती मँजिल सभी को रही थी |
मै लौटूँगा अब मेरे घर कैसे कहिए
लिवाने जो भेजा है बेटे की माँने |
मेरे लालने क्या था उसका बिगाडा
चला था उसी पर कहाँ अब मिलेगा |
उन लाशों मे कैसे मै ढूँढू ललन को
मेरी आँखों में छाया कोहरा घना है |
*अँब्रोस चेट्टियार*
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