हैवानियत

 हैवानियत


ऐ हवा रुक जा 

मेरी बात सुन ज़रा 

मेरा देस जल रहा 

तू उधर से ना जा | 


तू ऊंचा उठकर 

बादल क्यों ना लाये 

मेरी जलती धरती 

की तपन ना बुझाए |


जल जल कर वो 

जल को तरस रहे हैं 

तेरी ठंडक की चाहत में 

झुलस रहे हैं |


इक बूँद की आशा में 

वो बैठे हैं 

हम इंसानों की 

ज़ात परख रहे हैं | 


क्या ऐसा हो कि 

तुम भी बहो ना भडके 

कोई हैवानियत की आग 

यहाँ पे चलके |


मेरी रूहों को तुम 

आज फ़ना कर देना 

नही देखा जाता 

मासूमों को कुचलते |

    *अँब्रोस चेट्टियार*




टिप्पण्या

या ब्लॉगवरील लोकप्रिय पोस्ट

माय मराठी

राष्ट्रपिता

राहुल गांधी