गाँधी
.......गोडसे गाँधी जी पर कई कई हमले कई दशकों तक योजनाबद्ध तरीकों से करता रहा मगर विफल रहा, कभी पकडा भी गया मगर गाँधीजी ने उसे बारबार अहिंसा के प्रण में माफ कर दिया .. सारा देश और दुनिया गोडसे और उसके साथीयों और उनके मनसूबों के बारे में विस्तार से दशकों से जान रही थी जान चुकी थी | जिसने बार बार माफ किया उस ही दुनिया के महान संतको ही फिर भी मार देने वाले दुर्जन के खिलाफ जनआक्रोश थम न सका क्योंकि ऐसी भीड को बारबार सँभालने वाला जो दुनियाँ में शायद बुद्ध के बाद एक बार फिर पैदा हुआ था जिसकी ओर सारी दुनियाँ बडी आशा से देख रही थी उस संत को ही गोली दाग कर मार देने वाले को लोग किस तरह बख्शते भला, क्या पता , कौन कहे गाँधीजी के हत्या के बाद हुए दंगों को भडकाने मे भी उसी हत्यारेके साथियों का हाथ हो वरना अहिंसा के पुजारी शिष्य यूँही किसीपर हिंसक नही हो सकते.. सारी दुनियाँ चकित थी अँग्रेज चकित था और बहोत ही दुखद सुकून था उसे वो कहता कि हमारे रहते अगर गाँधी की हत्या होती तो हम कभी अपने आप को माफ नही कर सकते थे. मगर ये कैसी कौम है जो अपने ही नुमाइंदे को ऐसी बेरहम मौत दे जाती है ?
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