उम्मीद की मुलाकात
आ गए मेरी मौत का तमाशा बनाने
पुकारते रह गए हम डूबती साँसों को थामे
कोई आहट भी न तब मिली हमारे दर पर
हमारी पुकारों ने क्या झकझोरा नही वहाँ पहुँचकर
फिर अब कैसे आना किया मेहेरबान बताएँ
हम तो अरसा पहले ही निकल लिये हैं आशियाना बदलकर
अब आ ही गए हो तो कुछ बातें हो जाएँ
हमारी ही सही यादों को कुछ टटोला जाए
उनमें से भी उभरकर आएँगी बहोत सी हस्तियाँ
जिनसे तुम्हारा आज यहाँ मेरी मैयत पर हुआ है सामना
जो खास थे तुम्हारे लिये भी कभी उनसे आज
बाजू मे बैठकर कुछ गुफ्तगू हो सके तो लडालो अभी
फिर ना जाने ये मौक़ा कभी हाथ लगे ना लगे
ऐसी ही किसी मुलाकात में तब्दील ना हो जाए कहीं
अगली मुलाकात का झूटा वादा करके आज गर टाल दिया
तो ये भी मौका और अनगिनत यादें कहीं नासूर बनकर तुम्हे भीतरसे कुरेदना ना शुरू करदे
बस यही दिली तमन्ना थी यही बताना था
कुछ पल सुकून भरे यादों को ताजा करने वाले साथ गुजारने थे साथ
मगर खैर !
अब मेरी नैया काफी आगे निकल ली है
शुक्र है फिर से मुझे वो अँधियारी इंतजार की गलियाँ न देखनी होंगी
यहाँ जो कुछ है, होगा उससे मुझे फर्क अब नही पडता
क्योंकि मैने आँखोंको ना खोलने का फैसला लेकर ही
मूँद लिया था वहाँ से चलते वक्त
बाकी खैरियत ,
खुश रहना दोस्तों हम अब घर चलते है |
*अँब्रोस चेट्टियार*
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