नजर आने लगे हैं अब गाहे बगाहे बाजार मे

जो पुकारने पर भी घरों से कभी निकलते न थे 

अब जो निकले हैं तो ताज्जुब होता है             

कहीं मुल्कमे चुनाव नजदीक तो नही  

        *अँब्रोस चेट्टियार* 

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