जब वो नही रहेंगे ....
वो भी तो दिन थे
जब वक्त बेवक्त वो
आपके लिये हाजिर रहते थे..
आये दिन आये वक्त
बस आते जाते रहे..
मगर इंसान हैं.. सीमा है ..
फिर आपकी बेरुखी भी तो
खली हो सकती हैं...
कब तक आते जाते
कब तक राह तकते
कोई परवाह करता है कि नही
के बस जरुरत खत्म मेलजोल खत्म
नया दिन नया जमाना नये लोग नये मसले
बस धीरे धीरे आना काम होता जाता है..
फिर उम्मीद बाकी रहती है
कोई तो आएगा मिलने देखने हाल जानने
युंही पूछने चले आयेगा कोई..
मगर ऐसा होगा ?
🤔 शायद नहीं...
युंही चल बसेंगे वो भी ...
हम तो जब्त कर लेंगे मगर
वो
टूटकर बिखर जायेंगे
जिन्होंने तुम्हारी कभी
जान से ज्यादा परवाह करी थी..
उनको रूठकर कर यूं जाने ना दो
वर्ना तुम्हारा चैनो सुकून भी चला जायेगा
पछताकर रह जाओगे सिर्फ
फिर कोई लौटकर नही आयेगा ...
और यही युंही फिर चलता रहेगा..
अब उनकी ना उम्मिदी कचोटती है
के कोई नही आयेगा.. हमारे अखीर तक..
दिल छलनी हो जाता है..
क्या जाता है किसिका
कुछ पल किसीकी झोली मे डालने से
वो भी जिन्हे परवाह रही हो कभी
और शायद रहेगी आखिर तक
मगर वो कभी पुकारेंगे नही
बस कसमसा कर घुटकर मर जायेंगे..
हाय!!!
वो कहानियों की तरह कोई खिलखिलाता कुनबा काश कोई होता !!
कहीं दिखाई दे जाता !!!...
देख लेते
कलेजा ठंडक पा ss लेता...
.......
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