वो कहते हैं कि हमने समझना चाहिए 

फिर वो समझने से चूक जाते हैं 

हम कहते हैं कि हमसे कहा करो 

और हम अपनी भी कह नही पाते 

बस इसी कश्मकश की उधेडबुन में 

सारा कुछ उलझता ही चला जाता है ...  


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