ना बढकर सिखलाते हो 

ना बढकर समझाते हो 

ना ही बढकर कभी संवरने का मौका ही देते हो 

बस बिखरे होने की तोहमत मढकर 

तेज कदम कर लेते हो ... 

और कश्मकश मे युंही ठगे से हम तकते रह जाते हैं..

खैर नई क्या बात है

आयी गयी पुरानी है 

तुम थकते नही हो चलते 

फिर बाट निहारे क्यूँ थकना ...


टिप्पण्या

या ब्लॉगवरील लोकप्रिय पोस्ट

माय मराठी

राष्ट्रपिता

राहुल गांधी